Monday, June 15, 2009

कितने चौकस हैं अंग्रेज...


मुंबई से सटे अलीबागमें में कुछ दिन पहले घूमने गया था. अच्छी जगह है, शांत - अकेली और सुकून देने वाली. अलीबाग में आधा दर्जनभर बीचेस् हैं और एकाद दो किले. इसके अलावा देखने लायक कोई खास जगह नहीं. हां, रात होते ही यहां मच्छरों का हमला जानलेवा होता है.

एक दिन अलीबाग रहकर दूसरे दिन मैं स्कूटर से मुरुड की ओर चला. चूंकि छुट्टीओं पर था, मौसम और नई जगह का पूरा मजा लेते हुए धीरे धीरे अपना सफर तय कर रहा था. रास्ते में एक ब्रिज आया करीब 200 मीटर लंबा, दिखने में काफी पुराना था - पत्थर से बना, सो मैंने स्कुटर रोका. कुछ तस्वीरें खींचने के लिए. आस पडोस पूछताछ करने पर पता चला कि इसे आक्शी का ब्रीज कहते हैं और इसकी उम्र 100 साल से ज्यादा है. कुछ तस्वीरे लेने के बाद मैंने फिर अपना सफर आगे बढाया. पूरे सफर के दौरान रास्तेमें कई ब्रिज आए - लगभग सारे पुराने.

मुरुड पहुंचने पर वहां के बीच का भरपुर लुत्फ उठाया. शाम को दोस्तों के साथ महफिल जमी. डिनर में दोस्तों के अलावा अनायास ही उस इलाके के पीडब्ल्यूडी अधिकारी भी मौजूद थे. खाने के बाद गप लड़ाते समय मैंने उस अधिकारी से कहा, ' आपके इलाके में ढेर सारे पुराने ब्रीजेस् हैं, मरम्मत होती है या नहीं'

मुस्कुराते हुए उस अधिकारी नें जवाब दिया, ' आप किसकी बात कर रहे हैं. उन पुराने ब्रीजेस् की जो कि अंग्रेज बना गए हैं. अरे! उसे तोड देने चाहिए ऐसा फरमान तो पिछले ही साल ब्रिटेन से भी आ चुका है. '


मुझे कुछ समझ में नहीं आया. लिहाजा उस अधिकारी ने पूरा माजरा समझाते हुए कहा कि यह सारे ब्रिज की लाइफलाइन खत्म हो चुकी है. यह बात भारत सरकार को भले ही ना पता हो. लेकिन ब्रीटेन सरकार को जरुर पता है. दरअसल ब्रीटिश सरकार के पीडबल्युडी विभागमें एक शाखा है, जो ब्रीटेन द्वारा उनकी कॉलोनीज् में बनाए गए निर्माणों का लेखा जोखा रखती है. इस शाखा के पास ब्रीटिश सरकार द्वारा भारत में बनाए गए सारे निर्माणों की पूरी पूरी जानकारी डिजाइन समेत मौजूद है. ब्रीटिश सरकार की इस पीडबल्युडी की शाखा ने पिछले दिनों अलीबाग के पीडबल्युडी विभाग को खत लिखकर बताया है कि अलीबाग के इन ब्रीजेस् की जिंदगी अब खत्म हो चुकी है और वे कभी भी धराशायी हो सकते हैं. लिहाजा, इन ब्रीजेस को या तो तोड़ दिया जाए या फिर नए ब्रीजेस् बनाए जाएं.


अधिकारी की बात सुनकर मैं अवाक हो गया. मेरे दिमाग में एक ही बात घूम रही थी कि कितने चौकस हैं अंग्रेज. उनके पास अलीबाग जैसे छोटे इलाके की भी अहम जानकारी मौजूद है. इतना ही नहीं अपनी नैतिक जिम्मेदारिओं को निभाते हुए वे चेता भी रहे हैं कि अब इन ब्रीज से गुजरना खतरे से खाली नहीं.


ता.क. -- इन सारे ब्रिजेस् का अभी भी इस्तेमाल किया जा रहा है. न ही इन्हें दुरुस्त किया गया है न ही किसी तरह की मरम्मत. शायद भारत सरकार किसी ब्रिज के ढहने का इंतजार कर रही है.

उत्तर मुंबई की मलाड सीट पर एक रस्साकशी भरा जंग जारी है। इस सीट पर इस समय किसका पलड़ा भारी है? गुजराती मिडडे में छपा हुआ मेरा लेख।